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भविष्य में विकास की भागीदारी के लिए मध्य भारत के इस्पात उद्योगों को अपनाना होगा सहयोग का रास्ता: mj STEELATHON सम्मेलन
रायपुर: मध्य भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के इस्पात केंद्रों में कार्यरत मध्यम एवं छोटे इस्पात उत्पादकों को बड़े एकीकृत इस्पात निर्माताओं के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा। बड़े एकीकृत इस्पात उत्पादक (ISP) आक्रामक रूप से अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रहे हैं। उद्योग जगत के दिग्गजों ने शुक्रवार को रायपुर में आयोजित mj STEELATHON सम्मेलन में यह बात कही।
सम्मेलन के विषय ‘व्यवसायों को जोड़ना, अवसरों का सृजन करना’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए जिंदल स्टील लिमिटेड के प्रबंध निदेशक वी.आर. शर्मा ने कहा, “मध्य भारत के इस्पात क्षेत्र को सहयोगात्मक औद्योगिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि यहाँ की इस्पात इकाइयाँ अपेक्षाकृत छोटी हैं, जबकि एकीकृत इस्पात उत्पादक (ISP) बड़े पैमाने पर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं। साथ ही, पर्यावरण संबंधी चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं और नियम-कानून लगातार सख्त हो रहे हैं। ऐसे में छोटी इकाइयों के लिए सहकारी मॉडल अपनाना एक समाधान हो सकता है। इसके तहत विशेष प्रयोजन संस्थाओं (SPV) का गठन कर केंद्रीय सुविधाएँ विकसित की जा सकती हैं, जैसे एक साझा डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) इकाई।”
ग्रांट थॉर्नटन भारत में मेटल्स एंड माइनिंग इंडस्ट्री के लीडर एवं पार्टनर नीलाद्रि भट्टाचार्जी ने सुझाव दिया कि मध्य भारतीय इस्पात उत्पादकों को लंबे इस्पात उत्पादों (लॉन्ग स्टील) पर अपने पारंपरिक फोकस से आगे बढ़कर नए विकासशील क्षेत्रों में संभावनाएँ तलाशनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “विदर्भ और रायपुर जैसे क्षेत्रों के औद्योगिक संगठनों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन, पूंजीगत वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उपयुक्त अंतिम-उपयोग उद्योगों के विकास के लिए काम करना चाहिए। इससे एक ऐसा मजबूत औद्योगिक आधार तैयार होगा, जिस पर इस्पात उद्योग का विकास आगे बढ़ सकेगा।”
भारत के बदलते इस्पात परिदृश्य में छत्तीसगढ़ के महत्व को रेखांकित करते हुए mjunction services ltd के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय वर्मा ने कहा, “भारत की विकास यात्रा का अगला चरण यहीं आकार ले रहा है। भारत वर्ष 2047 तक 600 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस लक्ष्य को पूरा करने में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।”


